श्रावण मास एवं प्रथम श्रावण सोमवार के अवसर पर जिलाधिकारी ने कटहरा खास शिव मंदिर का किया स्थलीय निरीक्षण
महराजगंज। श्रावण मास एवं प्रथम श्रावण सोमवार के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के उद्देश्य से जिलाधिकारी श्री गौरव सिंह सोगरवाल ने जनपद के ऐतिहासिक कटहरा खास शिव मंदिर का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मुख्य मंदिर, यात्री निवास, मंदिर परिसर एवं उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का अवलोकन कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने तहसीलदार सदर को मंदिर परिसर में दुकानों को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित कराने के निर्देश दिए, ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। निरीक्षण के दौरान एक शौचालय बंद पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला पंचायतराज अधिकारी को शौचालय का नियमित संचालन सुनिश्चित कराने तथा मंदिर परिसर में निरंतर साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को स्वच्छ एवं व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने परिसर में स्थित कंपोजिट विद्यालय का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से संवाद कर उन्हें जीवन में बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही विद्यालय की बाउंड्री निर्माण का कार्य ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने सहायक पर्यटक अधिकारी को मंदिर परिसर में यात्री सुविधाओं का विस्तार करने तथा मंदिर के सुंदरीकरण एवं पर्यटन विकास से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए। मंदिर के समीप स्थित अमृत सरोवर में जल की कमी पाए जाने पर उन्होंने पर्याप्त जल भरवाने के निर्देश दिए, ताकि परिसर की प्राकृतिक सुंदरता एवं सरोवर की उपयोगिता बनी रहे।
मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए जिलाधिकारी ने तहसीलदार सदर को प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी ने भगवान शिव का दर्शन-पूजन एवं जलाभिषेक कर जनपदवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगल की कामना की।
कटहरा खास शिव मंदिर जनपद के प्राचीन एवं प्रमुख धार्मिक आस्था केंद्रों में से एक है। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को यहां मध्यरात्रि से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं। परंपरा के अनुसार रात्रि 12 बजे साधु-संतों की पूजा के उपरांत मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए खोल दिए जाते हैं।